हार बर्दाश्त न करने वाला योद्धा ‘संजू’!
संजू इस वर्ल्ड कप में उगते सूरज की तरह चमके, अंधेरे को चीरते हुए और आग की तरह जलते हुए। भले ही उन्हें पहले टीम में जगह नहीं मिली, लेकिन वे निराश नहीं हुए। वे इस सब्र के साथ आगे बढ़े कि उन्हें भी मौका मिलेगा। जब उनकी उम्मीदें खत्म हो गईं, तो वे शेर की तरह दहाड़े। यह इतना ज़्यादा था कि 140 करोड़ भारतीयों को गर्व हुआ। मानो इंडियन टीम ने कप चूम लिया हो। ज़िंदगी में उतार-चढ़ाव तो आते ही रहते हैं। हमें संजू की तरह बिना हार माने आगे बढ़ना सीखना चाहिए। आप क्या कहते हैं?










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